Tuesday, August 6, 2019

नया इतिहास, नया कश्मीर



सुरभि भावसार 

नहीं पड़ेंगे अब शेरों के गालों पर थप्पड़, कश्मीर में भी गूंजेगा 'जय हिंद' का नारा, पूरे हिंदुस्तान में लहराएगा सिर्फ तिरंगा क्योंकि अब इतिहास बदल गया है। 370 में बंधा  हुआ कश्मीर अब आजाद हो गया है, डल झील और गंगा की धार एक हो गई है, भारत अखंड हो गया है, यह सब मुमकिन हो पाया है तो सिर्फ 56 इंच के फैसले के कारण

मोदी सरकार का यह फैसला वाकई काबिले तारीफ है। कांग्रेस आज मोदी सरकार के इस फैसले का जिस हिम्मत से विरोध कर रही है शायद इतनी हिम्मत से उस समय खड़ी हो जाती तो शायद कश्मीर के कुछ हिस्से पर आज पाकिस्तान का कब्जा नहीं होता। खैर दाद देनी पड़ेगी मोदी सरकार की उस हिम्मत और फैसले की जिसने कश्मीर का राग अलपने वाले पाकिस्तान को उसकी औकात दिखा दी। 

56 इंच के फैसले ने कश्मीर के विकास में आने वाले रोड़े को तो जड़ से खत्म कर दिया लेकिन लोकसभा में गृह मंत्री अमित शाह के तेवर कुछ और ही कह रहे थे। लग रहा है कि  उनकी नजर पीओके पर भी है। गृहमंत्री ने जब सदन में कहा कि 'जब मैं जम्मू कश्मीर बोलता हूं तो उसका मतलब पाक अधिकृत कश्मीर और अक्साई चीन भी है, कश्मीर के लिए हम अपनी जान भी दे देंगे' इस दौरान उनका गुस्सा देखकर लग रहा था कि पीओके अभी बाकी है। सदन में उनके तेवर इतने कड़े थे जिसको देखकर यह कहना गलत नहीं होगा कि शायद अब अमित शाह पाक अधिकृत कश्मीर को पाकिस्तान के कब्जे से छुड़ा कर ही दम लेंगे।

मोदी सरकार के इस ऐतिहासिक फैसले ने इतिहास  रच दिया है लेकिन एक बात यह समझ में नहीं आ रही कि जो लोग देश को ही अपना सब कुछ बताते थे, देश के लिए कुछ भी करने को तैयार थे, आज वही लोग क्यों सरकार के उस फैसले के विरोध में उतर आए हैं जिससे मां भारती का सिर गर्व से ऊंचा हो रहा है। क्यों आज वही लोग इस फैसले के खिलाफ हो गए हैं जो भारत को अखंड बना रहा है।

कश्मीर में कल सूरज तो निकलेगा लेकिन सुबह नई होगी, झेलम का पानी तो वही रहेगा लेकिन अब आजादी से बहेगा, खूबसूरत वादियों में देशभक्ति की हवा बहेगी, कश्मीर की माटी में आतंक का बारूद नहीं चंदन की खुशबू महकेगी क्योकि ये ऩया कश्मीर है।

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