Thursday, May 30, 2019

बचपन में मरने के लिए छोड़ दी गई थीं, आज बुलंदियों के शिखर को छू रही स्मृति ईरानी




आज यानी 30 मई को नरेंद्र मोदी की दूसरी बार ताजपोशी होने वाली है। मोदी के शपथ ग्रहण समारोह में करीब 8 हजार मेहमानों के साथ ही फिल्म जगत की कई हस्तियां भी शामिल होंगी। राष्ट्रपति भवन में होने वाले शपथ ग्रहण में मोदी के साथ कई मंत्री भी शपथ लेंगे। इन मंत्रियों में एक नाम स्मृति ईरानी का भी है, जो इस बार कांग्रेस के गढ़ में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को हराकर लोकसभा पहुंचीं है।

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कभी रेस्टोरेंट में सफाई करने को मजबूर थी स्मृति

मॉडलिंग से अपने करियर की शुरुआत करने वाली स्मृति ईरानी ने 1998 में मिस इंडिया प्रतियोगिता में हिस्सा लिया लेकिन फाइनल तक नहीं पहुंच पाई। इसके बाद स्मृति ने मुंबई जाकर एक्टिंग में करियर बनाने की कोशिश की। यहां उन्हें काम नहीं मिला और अपना खर्च चलाने के लिए उन्हें एक रेस्टोरेंट में सफाई का काम तक करना पड़ा।

मैकडॉनल्ड में किया वेटर का काम

स्मृति ईरानी अज जिन बुलंदियों पर पहुंचीं है उसके पीछे उनकी कड़ी मेहनत है। एक जमाने में पेट भरने के लिए स्मृति ने मैकडॉनल्ड में वेटर का काम किया। स्मृति को य बुलंदियां नसीब से नहीं बल्कि अपनी कड़ी मेहनत और लगन के दम पर मिली है।

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मरने के लिए बिना कपड़े जमीन पर लिटा दिया था

दिल्ली में जन्मी स्मृति ईरानी एक मध्यमवर्गीय परिवार से थीं। रूढ़िवादी पंजाबी-बंगाली परिवार से ताल्लुक रखने वाली स्मृति ने परिवार की बंदिशों को तोड़कर ग्लैमर की दुनिया में कदम रखा था। एक इंटरव्यू में उन्होंने बताया था कि बेटी पैदा करने की वजह से उनकी मां को ताने दिए जाते थे। बचपन में वो किसी गंभीर बीमारी से पीड़ित थीं।

इस हालत में परिवार की एक बुजुर्ग महिला ने उन्हें बिना कपड़ों के जमीन पर लिटा दिया था, ताकि वो मर जाएं। जब मां ने इसका विरोध किया तो उन्हें कहा गया कि बेटी है मर जाएगी तो तुम्हारी जिंदगी आसान होगी। हालांकि मां-बाप के प्रगतिशील होने की वजह से उन्हें बचाया गया और वो जिंदगी में आगे बढ़ पाईं। 

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