कभी डांटतीं है तो कभी गले लगा लेती है, हमारी खुशी में खुश होकर अपने गम भुला देती है, हां वह मां होती है। शायद यह मां की दुआओं का ही असर है कि नरेंद्र मोदी एक बार फिर प्रचंड बहुमत के साथ प्रधानमंत्री बनने जा रहे हैं। दोबारा प्रधानमंत्री पद की शपथ लेने से पहले वह अपने मां का आशीर्वाद लेना अहमदाबाद पहुंचे थे।
ऐसा कोई त्यौहार नहीं, कोई बड़ा मौका नहीं जब मोदी अपनी मां का आशीर्वाद लेने नहीं पहुंचे हो। अपने कामों में व्यस्त रहने के बाद भी वह अपनी मां की सेहत का पूरा ध्यान रखते हैं। कोई भी बड़ा मौका हो वह पहले अपनी मां के पास पहुंचकर उनका आशीर्वाद लेना नहीं भूलते। शनिवार को भी मोदी अपनी मां का आशीर्वाद लेने गुजरात गए थे।
इससे पहले जब उन्होंने वाराणसी से अपना नामांकन भरा था तब भी अपनी मां का आशीर्वाद लिया था। इसके अलावा 2014 लोकसभा चुनाव के बाद अपनी मां का आशीर्वाद लेकर ही दिल्ली गए थे। आज भी मोदी अपने जन्मदिन पर सबसे पहले अपने मां के पास जाते हैं।
जब भी वह अपनी मां के पास जाते हैं तो प्रधानमंत्री बनकर नहीं बल्कि बेटा बनकर जाते हैं। उनकी मां से वह कितना प्यार करते हैं इस बात का अंदाजा तो तभी लग जाता है जब वह अपनी मां और उनके संघर्षों के बारे में बताते हैं तो उनकी आंखें भर आती है।
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लबों पर उसके कभी बद्दुआ नहीं होती, वह मां ही है जो कभी खफा नहीं होती। हीराबेन अपने बेटे नरेंद्र मोदी को अपनी आंख का तारा मानती है। जब वह उनसे मिलने जाते हैं तो उन्हें कुछ ना कुछ जरूर देतीं हैं। मोदी अपनी मां से मिले सवा रुपये को सवा सौ करोड़ देशवासियों का आशीर्वाद मानते हैं। आज मोदी जिन बुलंदियों को छू रहे है वह भी उनकी मां के आशीर्वाद का ही कमाल है।

bohot shaandar
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