सुरभि भावसार
पश्चिम बंगाल में भले ही टीएमसी की ममता सरकार हो लेकिन अभी जो हालात वहां चल रहे है वो 'ममता' के बिलकुल विपरीत है। इन दिनों बंगाल की राजनीति हिंसक होती दिख रही है। जैसे ही बंगाल की राजनीति में भगवा रंग चढ़ने लगा तो वहां की राजनीति लाल रंग में रंगने लगी। ममता राज में चुनाव-प्रचार लहुलुहान होने लगा है।
जी हां, मामला और कुछ नहीं भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के रोड शो के दौरान हुए हिंसा और बवाल का है। मंगलवार को अमित शाह कोलकाता में 7 किलोमीटर लम्बा रोड शो कर रहे थे। इस दौरान वहां जमकर बवाल और हिंसा हुई। वाहनों में आग लगा दी गई जिसके कारण रोड शो बीच में ही ख़त्म करना पड़ा।
इस बवाल के भाजपा और टीएमसी के बीच ना केवल जुबानी जंग तेज हो गई है बल्कि दोनों पार्टियों के बीच वीडियो वॉर भी छिड़ गया है। दोनों पार्टियों ने सबूत के तौर पर वीडियो जारी कर इस हिंसा के लिए एक-दूसरे को जिम्मेदार बताया है।
इस मामले में बुधवार को अमित शाह ने प्रेस कांफ्रेंस कर इस हिंसा के लिए सीधे तौर पर ममता बनर्जी को जिम्मेदार बताया है और कहा कि यदि CRPF नहीं होती तो मेरा वहां से बचकर निकल पाना मुश्किल पाना था। अमित शाह के इस बयान से यह कहा जा सकता है कि बंगाल में हिंसा कितनी बढ़ गई है।
इस दौरान अमित शाह ने चुनाव आयोग पर भी सवाल खड़े कर दिए। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग मूकदर्शक बनकर बैठा है और टीएमसी हिंसा करती जा रही है। अगर ऐसा ही चुनाव होता रहा तो चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल खड़े होने लगेंगे।
इतना ही नहीं टीएमसी द्वारा हिंसा के लिए भाजपा को जिम्मेदार बताने पर अमित शाह ने कहा कि 6 चरणों के चुनाव में केवल बंगाल में हिंसा हुई है। उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी केवल 42 सीटों पर चुनाव लड़ रही है और भाजपा हर राज्य में चुनाव लड़ रही है लेकिन हिंसा केवल पश्चिम बंगाल में हो रही है।
इतना ही नहीं टीएमसी ने भाजपा पर ईश्वरचंद विद्यासागर की मूर्ति तोड़ने का भी आरोप लगाया था जिसका जवाब देते हुए अमित शाह ने कहा कि ईश्वरचंद विद्यासागर की मूर्तियां भी टीएमसी वालों ने ही तोड़ी थीं, हम तो बाहर थे अंदर ही नहीं जा सकते थे। शाह ने सवाल उठाते हुए पूछा कि जब मेन गेट ही बंद था और बीजेपी वाले बाहर थे, तो कोई अंदर कैसे घुसा और किसने मूर्ति तोड़ दी। ये ही सबूत है कि ईश्वरचंद विद्यासागर की प्रतिमा को टीएमसी वालों ने ही तोड़ा है।
बंगाल में हुई हिंसा की चर्चा पूरे देश में हो रही है। दिल्ली से लेकर बंगाल तक इसका विरोध हो रहा है। इस समय देश में चुनावी हिंसा की घटनाएं बेहद कम हो रही है तो वही पश्चिम बंगाल ममता की खूनी राजनीति से लाल होता जा रहा है। ऐसे में 2019 की लड़ाई में जनता की निगाहें सबसे ज्यादा कही टिकी है तो वो पश्चिम बंगाल है। अब ये तो 23 मई को ही साफ़ हो पाएगा कि बंगाल में ममता की टीएमसी सत्ता की कुर्सी पर बैठेगी या वहां की राजनीति पर भगवा रंग चढ़ेगा।

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