Tuesday, May 14, 2019

क्या अब लोकतंत्र के मंदिर में ऐसे लोग बैठेंगे?


सुरभि भावसार

लोकसभा चुनाव के प्रचार के लिए राजनीतिक पार्टियां ताबड़तोड़ रैलियां और रोड शो कर जनता को अपने पक्ष में करने में जुटी है। इनमें झूठे-सच्चे वादे और बेतुके बयान देकर मर्यादा को तार-तार कर रहे हैं। चुनाव जीतकर लोकतंत्र के सबसे बड़े मंदिर यानी संसद पहुंचने के लिए क्या नेता अपनी मर्यादा लांघ जाएंगे? क्या महिलाओं का सम्मान करना भूल जाएंगे? चुनावी माहौल में जुबानी जंग होना आम बात है लेकिन जब किसी नेता की भाषा इतनी गिर जाए तो आप क्या कहेंगे?

हाल ही में समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार आजम खां ने भाजपा उम्मीदवार जया प्रदा पर एक बार फिर बेहद आपत्तिजनक टिप्पणी की है। पहले भी वह जया प्रदा के चरित्र को लेकर बयान दे चुके है लेकिन इस बार तो ये जुबानी जंग इतनी बढ़ गई कि वह जाया प्रदा के कपड़ों पर टिप्पणी कर बैठे।

शर्म आती है नेताओं के ऐसे बयानों पर कि चुनाव जीतने के लिए अब ये महिलाओं पर टिप्पणी करने लगेंगे। आजम खां ने इस शर्मनाक बयान पर विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने पलटवार करते हुए ट्वीट किया है। उन्होंने लिखा कि 'मुलायम भाई, आप समाजवादी पार्टी के पितामह हैं।आपके सामने रामपुर में द्रौपदी का चीर हरण हो रहा है, आप भीष्म की तरह मौन साधने की गलती ना करें।' हालांकि सुषमा स्वराज के इस बयान का कोई असर नहीं होना है क्योकि उनकी पार्टी में भी भीष्म पितामाह की स्थिति मौन पुरुष की तरह है। ये कोई नई बात नहीं है त्रेता युग में भी भीष्म पितामाह मौन थे और इस कलयुग के भी भीष्म पितामाह मौन है।

आजम खां ही नहीं उनसे पहले केंद्रीय मंत्री एवं भाजपा के वरिष्ठ नेता अश्विनी चौबे ने भी राजद नेता राबड़ी देवी पर टिप्पणी की है। अश्विनी चौबे ने राबड़ी देवी को घूंघट में रहने की सलाह दे डाली। उन्होंने कहा था कि ‘‘राजग में कोई दिक्कत नहीं है। मैं राबड़ी देवी के बारे में क्या कहूं? वह मेरी भाभी हैं। बेहतर होगा यदि वह घूंघट में रहें।’’ 

ये कोई पहला मौका नहीं है जब नेता इस तरह के बयान दे रहे है। इससे पहले भी महिला सशक्तिकरण की बात करने वाले कई नेता महिलाओं पर टिप्पणी कर चुके है। महिलाओं को उनके अधिकार दिलाने और सशक्त बनाने के लिए टीवी पर बहस करने से पहले महिलाओं की इज्जत करना सीखना होगा।

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