सुरभि भावसार
लोकसभा चुनाव का शोर आज थम गया है। चुनाव ख़त्म होने के बाद आए एग्जिट पोल में एक बार फिर मोदी सरकार सत्ता में वापसी करती दिख रही है। एग्जिट पोल में एनडीए को मिल रही बढ़त ने सियासी गलियारों में हलचल मचा दी है। 2014 की तरह 2019 में भी मोदी का जादू चलता नजर आ रहा है।
तमाम टीवी चैनलों पर आए एग्जिट पोल के मुताबिक़ नरेंद्र मोदी एक बार फिर संसद में प्रधानमंत्री के रुप में बैठने जा रहे है। मध्यप्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में हाल ही में हुए विधानसभा में मिली करारी हार के बाद लोकसभा चुनाव में पूरे दमखम के साथ उतरी भाजपा शानदार जीत के साथ लौट रही है।
एग्जिट पोल के आंकड़ों की बात करे तो ज़ी न्यूज़ के मुताबिक़ एनडीए को 300 सीटें, कांग्रेस को 128 सीटें और अन्य को 114 सीटें मिल रही है। टाइम्स नाउ के एग्जिट पोल भाजपा को 306 सीटें, कांग्रेस को 142 सीटें और अन्य को 94 सीटें मिल रही है। वही इंडिया टुडे के सर्वे पर नजर डाले तो यहां एनडीए को 339 से 365 सीटें, यूपीए को 77 से 110 सीटें और अन्य को 59 से 79 सीटें मिल रही है।
एग्जिट पोल के आंकड़ों से साफ़ दिख रहा है कि देश में एक बार फिर कमल खिलने जा रहा है. यदि ये एग्जिट पोल सही बैठे तो भाजपा का 'अबकी बार 300 पार' वाला नारा सही साबित होगा। हालांकि स्थिति 23 मई को साफ़ होगी कि केंद्र की सत्ता बदल जाएगी या एक बार फिर कमल खिलेगा।
ये जरुरी नहीं है कि 23 मई को ये एग्जिट पोल सटीक बैठेंगे। इन एग्जिट पोल पर पूरी तरह विश्वास नहीं किया जा सकता क्योकि ऐसा भी हुआ है जब एग्जिट पोल पूरी तरह फ्लॉप हुए है। ऐसा एक बार नहीं बल्कि दो चुनावों में लगातार एग्जिट पोल फ्लॉप साबित हुए है।
2004 में जब अटल बिहारी वाजपेयी प्रधानमंत्री थे तब एग्जिट पोल बता रहे थे कि वह सत्ता में आसानी से वापसी कर लेंगे। एग्जिट पोल में एनडीए को 248 सीटें, यूपीए को 190 और अन्य को 105 सीटें दी जा रही थी लेकिन जब नतीजे आए तो ये आंकड़ें पूरी तरह पलट गए और एनडीए सिर्फ 190 सीटों पर सिमट गई। यूपीए 222 सीटों के साथ सत्ता में आई और मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री बने।
इसके बाद एग्जिट पोल 2015 में बिहार विधानसभा चुनाव के समय नाकाम रहे। उस चुनाव में भी भाजपा को जेडीयू-आरजेडी गठबंधन पर भारी बताया जा रहा था लेकिन जब नतीजे आए तो भाजपा बुरी तरह पिछड़ गई। भाजपा को केवल 58 सीटें मिली थी, वही लालू नीतीश की जोड़ी ने 178 सीटों पर परचम लहराया।
इस स्थिति को देखते हुए एग्जिट पोल पर पूरी तरह विश्वास नहीं किया जा सकता। अब 23 मई को ही साफ़ होगा कि एग्जिट पोल फिर सटीक बैठेंगे या हो जाएंगे गोल?

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