Friday, June 7, 2019

फिर हैवानियत, फिर गिरफ्तारी, फिर आश्वासन लेकिन कब तक...




सुरभि भावसार

जिस आंगन में वह नन्ही चिड़ियां चहचहाती थी, वहां अब मातम, गम और आंसू है। जहां वह बच्ची खेलती थी आज वह आंगन सुना पड़ा है। आज यह कहना पड़ रहा है कि बेटी हम शर्मिंदा है, तेरे कातिल अभी जिंदा है। हम कैसे समाज में रह रहे है, जहां आपसी रंजिश के चलते ढाई साल की मासूम की बेरहमी से हत्या कर दी जाती है और सबूत छिपाने के लिए उसका शव कूड़े के ढेर में फेक दिया जाता है। 

मामला उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ का है। यहां आपसी रंजिश के कारण ढाई साल की बच्ची की बेरहमी से हत्या कर दी गई। 30 मई को बच्ची घर से गायब हो गई। रातभर जब उसका पता नहीं लगा तो परिजनों ने 31 मई को पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस को जिस मामले में जी-जान से जुट जाना चाहिए था, उसमे वह हाथ पर हाथ रखकर बैठी रही। 


दो दिन बाद 2 जून को उसी बच्ची का शव कूड़े के ढेर में मिलता है। शव जिस हालत में मिला है उसे देखकर किसी भी रूह कांप सकती है। बच्ची की आंखें निकली हुई थी, उसका हाथ कटा हुआ था। आशंका जताई जा रही थी कि हत्या से पहले बच्ची के साथ रेप हुआ है लेकिन पुलिस मामला बढ़ते देख कह दिया कि बच्ची के साथ रेप नहीं हुआ है लेकिन पोस्टमार्टम रिपोर्ट कहती है कि बच्ची का शव इस हालत में ही नहीं था कि बलात्कार जैसी हैवानियत की जांच की जा सके। बच्ची का शव गल चुका था। 

इस घटना ने फिर देश को झकझोर कर रख दिया है। एक बार फिर लोग मोमबत्ती लेकर सड़क पर उतर गए और नेताओं ने दुख जताते हुए ट्वीट कर दिए। बॉलीवुड ने फिर सोशल मीडिया पर अपना गुस्सा दिखा दिया। फिर एक बार पुलिसकर्मियों को सस्पेंड कर दिया गया। आखिर कब तक ये सब होता रहेगा। क्यों सरकार आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं करती। योगी आदित्यनाथ के आने के बाद कहा जा रहा था कि उत्तर प्रदेश रातोरात बदल जाएगा लेकिन कुछ नहीं हुआ। 


पिछले एक साल में  3704 बलात्कार हुए है। बलात्कार का ये आंकड़ा उस देश का है जहां लोग खुद को सभ्य कहते है। वोट कमाने के लिए नेता बहन-बेटियों की सुरक्षा पर बड़ी-बड़ी बातें करते है लेकिन वोट मिलते ही सब भूल जाते है। 

आखिर कब तक हमारे देश में ये सब चलता रहेगा। कब तक लोग मोमबत्ती लेकर सड़क पर उतरते रहेंगे और न्याय मांगते रहेंगे। जिस तरह मध्यप्रदेश की शिवराज सरकार ने 12 साल से कम उम्र की बच्ची के साथ बलात्कार होने पर सजा-ए-मौत का कानून लागू किया है, उसी को यदि सभी राज्य सरकारें लागू करें और उसका कठोरता से पालन किया जाए तो ऐसे मामलो पर लगाम लग सकती है। 



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