साल 2011 से बंगाल की सत्ता संभाल रही ममता बनर्जी जितनी गुस्से वाली है उतनी ही नर्म दिल और सादगी से भरी हुई है। मुख्यमंत्री के पद पर रहने के बाद भी जितनी सादगी से वह रहती है उसका हर कोई कायल है। सफ़ेद साड़ी और स्लीपर पहनने वाली ममता संघर्ष भरे दिनों से जूझकर सत्ता तक पहुंची है। भले ही आज वह देश के बड़े राज्य की मुख्यमंत्री है लेकिन मेहमानों का स्वागत सादगी के साथ मुरमुरे और पानी से ही करती हैं।
5 जनवरी 1955 में कोलकाता में जन्मी ममता बनर्जी सादगी भरा जीवन जीने के लिए जानी जाती हैं। राजनीति में उनकी छवि तेज तर्रार और आक्रामक अंदाज वाले नेता की है। ममता ने कोलकामा विश्वविद्यालय से इस्लामिक इतिहास में एमए की डिग्री प्राप्त की है। साथ ही वह वकालत की पढ़ाई भी कर चुकी हैं। राजनीति के क्षेत्र में तो उन्हें हर कोई जानता है लेकिन क्या आप जानते है कि वह हमेशा सफ़ेद साड़ी ही क्यों पहनती है। शायद नहीं तो हम आपको बताते है इसके पीछे का कारण।
हमने ममता बनर्जी को जहां भी देखा है हमेशा सफ़ेद रंग की साड़ी पहने ही देखा है। दरअसल, ममता को सादा जीवन जीना ही पसंद है। जब वह 9 साल की थी तभी उनके पिता का निधन हो गया था। उनका परिवार गरीबी से झूझने लगा और इस वजह से उन्हें कपड़े खरीदने का भी शौक नहीं रहा। आज उन्हें किसी चीज की कोई कमी नहीं है लेकिन आज भी वह अपने घर आए मेहमानों का स्वागत मुरमुरे और पानी से हीं किया करतीं हैं।
दीदी का राजनीतिक सफ़र-
दीदी के नाम से जानी जाने वाली ममता बनर्जी का राजनीतिक सफ़र 1970 में शुरू हुआ, जब वह कांग्रेस पार्टी की कार्यकर्ता बनीं। 1976 से 1980 तक वह महिला कांग्रेस की महासचिव रहीं। 1984 में मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीएम) के वरिष्ठ नेता सोमनाथ चटर्जी को जादवपुर लोकसभा सीट से हराकर सबसे युवा सांसद बनीं।
ममता दो बार रेल मंत्री भी रह चुकी है। इसके अलावा वह केंद्र सरकार में कोयला, मानव संसाधन विकास राज्यमंत्री, युवा मामलों और खेल के साथ ही महिला व बाल विकास की राज्य मंत्री भी रह चुकी हैं। 2011 में उन्होंने पश्चिम बंगाल में वामपंथी मोर्चे का सफाया किया और राज्य की मुख्यमंत्री बनीं।

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