सुरभि भावसार
मोदी सरकार में नंबर 2 के नेता अमित शाह के सामने अब गृह मंत्री बनने के बाद देश के अंदरुनी मामलों से निपटने की चुनौतियां होगी। शाह को जम्मू-कश्मीर, नक्सलवाद, आतंकवाद, पश्चिम बंगाल में बढ़ते बांग्लादेशियों की संख्या और सीमा पर पड़ोसी देश की नापाक हरकतों पर लगाम लगाने के लिए कमर कसनी होगी। गुजरात सरकार में लगातार नौं साल तक गृह मंत्री का पद संभालने वाले अमित शाह देश को तोड़ने वाली नब्जों को आसानी से दबोच सकते है। वैसे भी गुजरात दंगों के बाद अमित शाह ने गृह मंत्री रहते हुए अप्रिय घटनाओं पर ऐसा अंकुश लगाया कि कोई बड़ा मामला वहां से आज तक निकलकर सामने नहीं आया।
धारा 370
जम्मू-कश्मीर में साल के अंत में चुनाव हो सकते है। ऐसे में हमेशा से भाजपा का एजेंडा धारा 370 को खत्म करना और अनुच्छेद 35 ए को निरस्त करने का रहा है, जिसपर गृह मंत्रालय का रुख राज्य की सियासत में काफी उतार-चढ़ाव लाने वाला साबित हो सकता है। अमित शाह के सामने इन मामलों से निपटना एक बड़ी चुनौती होगी। अब देखना ये होगा कि क्या शाह धारा 370 को आउट कर पाएंगे?
पश्चिम बंगाल
इसके अलावा पश्चिम बंगाल की सियासी स्थिति को लेकर भी देश की निगाहें अमित शाह पर टिकी हुई है। गौरतलब है कि बंगाल में दीदी की कानून व्यवस्था और राज्य से हिंसा की खबर आती रहती है। बंगाल में भाजपा और टीएमसी के बीच चल रहे तनाव के बीच यह देखना भी काफी दिलचस्प होगा कि बतौर गृह मंत्री अमित शाह और दीदी के बीच कानून व्यवस्था और दूसरे मामलों में संबंध कैसे होंगे।
नक्सलवाद
इन दिनों नक्सली हमलों की संख्या भी बढ़ी है। कुल मिलाकर यदि देखा जाए तो नक्सली हिंसा में कमी आई है। आंध्र प्रदेश और पश्चिम बंगाल में माओवादी कमजोर पड़े हैं, लेकिन छत्तीसगढ़, ओडिशा, झारखंड और बिहार में हमले तेज हो गए है। ऐसे में अमित शाह के सामने नक्सलवाद को पूरी तरह से कुचलना एक बड़ी चुनौती है।
आतंकवाद
अमित शाह हमेश कहते रहे है कि आतंकवाद के खिलाफ उनकी और उनकी सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति हमेशा रहेगी। ऐसे में अब घाटी को आतंक मुक्त करने की जिम्मेदारी अमित शाह के कंधो पर है। सीमा पार से बढ़ रही आतंकी घटनाओं पर काबू पाना अब गृह मंत्री के सामने बड़ी चुनौती है।
एनआरसी
भाजपा पूर्वोत्तर में लगातार पैर पसारने की कोशिश कर रही है। कयास लगाए जा रहे है कि गृह मंत्रालय की प्राथमिकता पूर्वोत्तर भी हो सकता है। ऐसे में अमित शाह के सामने एक चुनौती एनारसी को लागू करवाने की भी है।
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असम में एनआरसी को लेकर भी विवाद बढ़ा है। कोई भी वाजिब भारतीय नागरिक एनआरसी से बाहर न रह जाए, यह सुनिश्चित करना नए गृह मंत्री के लिए एक बड़ी चुनौती है। अमित शाह कहते रहे है कि देश में अवैध रुप से रह रहे बांग्लादेशी घुसपैठियों को देश से निकाल बाहर करेंगे। अब देखन यह है कि शाह इस चुनौती का सामना कैसे करते है।
ये सभी जानते है कि असम सहित पूर्वोत्तर के कई राज्यों में एनआरसी का जमकर विरोध हो रहा है। वहीं पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी एनआरसी का विरोध करने में मुखर रही हैं। ऐसे में यदि अमित शाह इसे लागू करते है कि ममता सरकार के साथ उनका टकराव और भी बढ़ सकता है।

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