Saturday, July 13, 2019

पिता की लाड़ली का वकील बना मीडिया!




सुरभि भावसार


बचपन में माता-पिता ने हाथ पकड़कर चलना सिखाया, बड़े हुए तो स्कूल भेज पढ़ाया-लिखाया, हर शौक पूरे किए, एक बार बोलने पर हर चीज हाजिर कर दी, आज वहीं बच्चे बड़े होकर दुनिया के सामने उन्हें गलत बता रहे हैं। आज प्यार इतना जरुरी हो गया है कि माता-पिता को ही जान का दुश्मन बताने लगे। भले ही भलाई के लिए मां ने फटकार लगाई हो, आज वह फटकार टॉर्चर बन गई। उस पिता ने कभी सोचा नहीं होगा कि उसके बच्चे बड़े होकर उसकी ही जगहंसाई कराएंगे।

मामला और कोई नहीं, भाजपा विधायक राजेश मिश्रा और उनकी बेटी साक्षी मिश्र का है। साक्षी ने अजितेश नाम के लड़के से प्यार किया और उस प्यार को अंजाम तक पहुंचाया। दोनों ने भागकर शादी कर ली। शादी के बाद साक्षी ने अपने पति के साथ वीडियो बनाया और सोशल मीडिया पर डाल दिया। वीडियो में साक्षी अपने ही पिता से जान को खतरा बताती है और पुलिस से मदद की गुहार लगाती है।


वीडियो सामने आते ही कुछ न्यूज़ चैनल वाले इतनी हमदर्दी जताने लगते है कि उन्हें अपने स्टूडियो में बुला लेते है और दिनभर इसी मुद्दे पर लाइव चर्चा होने लगती है। लाइव कैमरे पर उनसे तमाम सवाल पूछे जाते है। यहां यह सवाल पूछ्ना गलत नहीं होगा कि क्या मीडिया का ऐसा करना सही है? क्या इससे समाज में सही संदेश जा रहा है? क्या भागकर शादी करने वालों की मदद अव मीडिया करेगा?

यहां बात गैर जाति में शादी करने की नहीं है। बात है गलत तरीके से शादी करने की, बात है तो मां-बाप के खिलाफ जाकर, उनके आशीर्वाद के बिना शादी करने की, बात है तो वीडियो डालकर उनकी जगहंसाई करने की। किसी का ये कदम उसके सच्चे प्यार की निशानी नहीं बल्कि ड्रामा है। एक लड़के को भी किसी की बेटी को भगाने से पहले सौ बार सोचन चाहिए।


साक्षी और अजितेश ने तो अपने मन की कर ली और कुछ मीडिया वाले  इस काम में उनका पूरा साथ दे रहे हैं। उनके वकील बनकर खड़े हो गए है लेकिन क्या किसी ने उस पिता के बारे में सोचा है जिसके लिए इससे बड़ी पीड़ा और कोई हो ही नहीं सकती। क्या बीत रही होगी उस पिता पर जिसने अपनी बेटी को फूलों की तरह पाला और आज वहीं बड़ी होकर एक लड़के के लिए उन्ही के खिलाफ खड़ी हो गई हो।

न्यूज़ चैनलों पर साक्षी को लेकर तमाम नौटंकियां चल रही है, हर कोई उसके पिता राजेश मिश्रा को कोस रहा है लेकिन किसी ने उसके पिता की आवाज नहीं सुनी। साखी के पिता ने कहा है 'मैं ना तो जात-पात में विश्वास रखता हूं और ना ही शादी के खिलाफ हूं। मेरी फिक्र भी हर पिता की तरह ही है।  वह लड़का ना ही कुछ कामाता है और ना ही कुछ काम करता है। इसके अलावा वह साक्षी ने 9 साल बड़ा है। मुझे साक्षी के भविष्य की चिंता है। मेरी जगह कोई और पिता होता तो वह भी ऐसे ही सोचता।'

इसके बाद हाल ही में इस मामले में नया ट्विस्ट आया है। सोशल मीडिया पर अजितेश की एक फोटो वायरल हो रही है, जिसको लेकर कहा जा रहा है कि अजितेश की सगाई भोपाल की रहने वाली एक लड़की से हुई थी। शादी की तैयारियां भी शुरू हो गई थी। हालांकि बाद में ये सगाई तोड़ दी गई।

ऐसे में एक पिता की चिंता करना क्या गलत है? क्या माता-पिता का बेटी को गलत रास्ते पर जाने से रोकना गलत है? क्या एक बेटी का माता-पिता को पूरे देश के सामने इस तरह जलील करना सही है? कुछ चैनल टीआरपी के चक्कर में लगातार एक पिता का मानसिक रूप से शोषण कर रहे है। जहां एक तरफ प्रधानमंत्री मोदी  'बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओं' का संदेश देते हुए नजर आ रहे है, वहीं कुछ चैनल अप्रत्यक्ष तौर पर 'बेटी भागाओं, मीडिया के सामने आओ' जैसी विकृत मानसिकता को जन्म दे रहे है।

क्या एक पिता को अपनी बेटी के सही-गलत के बारे में सोचने का अधिकार नहीं है? हर पिता की हसरत होती है कि जब बेटी जवान हो जाए तब उसकी शादी एक अच्छे घर में हो और उसके सुसराल में उसे कोई तकलीफ ना हो। इसी सोच के भार से पिता अपनी पूरी जिंदगी बेटी के लिए कुर्बान कर देता है। यही इच्छा विधायक जी की भी थी लेकिन साक्षी ने अपने पिता के इन सपनो को चूर-चूर कर दिया।

हालांकि किसी लड़की को भी अपनी पसंद का जीवनसाथी चुनने का अधिकार है। शायद यही सोचकर साक्षी ने भी भागकर शादी की और जान का खतरा होने पर मीडिया के सामने भी आई और इलाहबाद हाईकोर्ट से सुरक्षा की गुहार लगाई, जिसके बाद साक्षी को सुरक्षा भी मिली और मीडिया का समर्थन भी। वहीं विधायक मिश्रा भी कह चुके है कि साक्षी को जहां रहना है रहे लेकिन खुश रहे। जिसके बाद अब साक्षी को भी इस तरह अपने माता-पिता की जगहंसाई करवाना बंद कर देना चाहिए और चैन से अपने ससुराल वालों के साथ रहना चाहिए। 



1 comment:

  1. Sac kha sakshi ko ye band krna chiye aise logo kisi bjh se ik bar fir logo ko socne ko mjboor kr deta hai

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