सुरभि भावसार
राजनीति का चमकता सितारा और कांग्रेस की वरिष्ठ नेता शीला दीक्षित अब हमारे बीच नहीं रही। शनिवार को 81 साल की उम्र में उनका निधन हो गया। राजीव गांधी सरकार में केंद्रीय मंत्री और दिल्ली की तीन बार मुख्यमंत्री रहीं शीला दीक्षित कांग्रेस पार्टी का बड़ा चेहरा मानी जाती थी।
राजीव गांधी सरकार में केंद्रीय मंत्री और दिल्ली की तीन बार मुख्यमंत्री रहीं शीला दीक्षित को कॉलेज के जमाने से ही राजनीति में दिलचस्पी थी। मुख्यमंत्री रहने के बाद शीला दीक्षित केरल की राज्यपाल भी बनीं। 1984 से 1989 तक उत्तर प्रदेश के कन्नौज से सांसद रहीं।
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शीला दीक्षित ने दिल्ली में कई विकास कार्य किए है। शीला दीक्षित का राजनीतिक सफ़र बढ़िया चल रहा था तभी आम आदमी पार्टी वजूद में आई। आम आदमी पार्टी की ऐसी आंधी चली कि शीला को हार का सामना करना पड़ा। शीला दीक्षित की हार को लेकर राजनीतिक जानकारों का मानना है कि वह विरोधी लहर का शिकार हुई थी, उनके काम में कोई कमी नहीं थी और ना ही जनता में उनको लेकर कोई नाराजगी थी।
मुख्यमंत्री पद से हटने के बाद भी उन्हें जनता का प्यार मिलता रहा। शीला दीक्षित को कांग्रेस उन चंद नेताओं में गिना जता है जो पार्टी के बुरे समय में साथ रहे। उन्हें एक मंजी हुई राजनेता के रूप में जाना जाता रहा है। उनके नरम रवैया के लिए भी अक्सर तारीफ की जाती है ।
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शीला दीक्षित ने कुछ ऐसे काम भी किए है जिसने लोगों की जिंदगी पर भी गहरा असर डाला। उन्होंने लड़कियों को स्कूल में लाने के लिए पहली बार 'सेनेटरी नैपकिन' बंटवाया था। दिल्ली में पहले फ्लाईओवर का आधार, मेट्रो, सीएनजी और दिल्ली की हरियाली शीला दीक्षित की ही देन है। आज देश ने राजनीति का चमकता सितारा खो दिया है।

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